दिवाली / दीपावली पर निबंध | Essay on Diwali in Hindi

दिवाली _ दीपावली पर निबंध

Essay on Diwali in Hindi

Let’s start the essay on diwali in hindi.

“दीयों की रौशनी से झिलमिलाता आँगन हो,
पटाकों की गूंजो से आसमान रोशन हो,
ऐसी आए झूम के ये दीवाली,
हर तरफ ख़ुशियों का मौसम हो…”

रूपरेखा –

  1. प्रस्तावना 
  2. दिवाली मनाने का कारण 
  3. दिवाली की तैयारी
  4. दिवाली मनाने का तरीका
  5. दिवाली त्यौहार का महत्व
  6. दोष
  7. उपसंहार

essay on diwali in hindi

प्रस्तावना 

वैसे तो भारत में 151 से ज्यादा त्यौहार मनाये जाते है यह एक बड़ी संख्या है जिसमे से दिवाली सबसे प्रसिध्द और बड़े पैमाने पर मनाया जाने वाला त्यौहार है। हर साल यह कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है ।

दिवाली मनाने का कारण

यह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है इस दिन अयोध्यावासियों ने मिट्टी के दीपक जलाकर तथा अपने घरों को फूलों से सजाकर भगवान राम का स्वागत किया था। दिवाली की तैयारी – दिवाली से कुछ दिनों पहले लोग अपने घरों की साफ – सफाई तथा लिपाई – पुताई शुरू कर देते है। व्यापारी अपनी दुकानों को पेंट करते है तथा सजाते है। दिवाली पर बाजारों को एक नया रूप मिलता है।

दिवाली त्यौहार मनाने का तरीका

यह त्यौहार पांच दिनों तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार धनतेरस के दिन शुरू होता है तथा भाई – दूज तक चलता है। धनतेरस के दिन सोने – चाँदी तथा नई वस्तुओं को खरीदना शुभ माना जाता है। अगले दिन नरक चौदस को लोग सूर्योदय से पूर्व स्नान करते है । इसके बाद अमावस्या के दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। मिठाइयाँ, बताशे, लड्डू – पेड़े आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है इस दिन लोग नये कपड़े पहनते है। फुलझड़ियाँ जलाते है तथा फटाखें फोड़े जाते है। रंग – बिरंगे दीप ऐसे लगते है मानों हम स्वर्ग का अनुभव धरती पर ले रहे हैं। लोग एक – दूसरे को गले लगाते हैं मिठाइयाँ बाँटते है।
एक – दूसरे को दीपावली की शुभकामनायें दी जाती है।

दिवाली त्यौहार का महत्त्व  

दिवाली हिन्दुओं , जैन सिखों और बौहदो द्वारा मनाई जाती है हालाँकि प्रत्येक धर्म के लिए यह अलग – अलग कहानियों का प्रातीक है लेकिन फिर भी यह त्यौहार अंधेरे पर उजाले की, अज्ञानता पर ज्ञान की और बुराई पर अच्छाई की जीत है।

दोष 

दिवाली हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है लेकिन कुछ लोग इस दिन जुआ – सट्टा आदि खेलते है और इसे लक्ष्मी का अपमान होता है । साथ ही आतिशबाजी के अत्याधिक प्रयोग से जान – माल तथा पैसे की बर्बादी होती है एवं पर्यावरण पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है । यदि इन बुराइयों से छुटकारा पा लिया जाए, तो यह त्यौहार सभी के लिए सुखद भविष्य का सन्देश लाता है।

उपसंहार    

दिवाली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लोग अपने मतभेदों को भूल जाते है। लेकिन कुछ बर्षों से हम इस शुभ दिन पर वातावरण को नुकसान पहुँचा रहें हैं। हम वर्तमान पीढ़ी को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। अत: हमें वातावरण को कम से कम नुकसान पहुँचा कर इस महान त्यौहार को मनाना चाहिए।  

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